हार्दिक को ट्रोल करना गलत, टीम मालिकों का भी यही है रवैया- ‘बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रूपैया’

हार्दिक पंड्या पर निशाना साधने से पहले ये नहीं भूलना चाहिए कि मुंबई इंडियंस ने ही हार्दिक पंड्या को रिलीज भी कर दिया था. उस वक्त तो किसी ने टीम मालिकों पर सवाल नहीं उठाए थे. हार्दिक पंड्या उस वक्त करियर के बुरे दौर से गुजर रहे थे. उनकी फिटनेस खराब चल रही थी. हार्दिक पंड्या बल्लेबाजी तो कर रहे थे लेकिन अच्छी तरह गेंदबाजी नहीं कर पा रहे थे. ऐसे में 2022 के मेगा ऑक्शन से पहले मुंबई इंडियंस ने उन्हें रिलीज कर दिया. मुंबई इंडियंस ने तब रोहित शर्मा, जसप्रीत बुमराह, सूर्यकुमार यादव और कीरॉन पोलार्ड को ‘रिटेन’ किया था.

रोहित शर्मा, जसप्रीत बुमराह और सूर्यकुमार यादव तो स्पेशलिस्ट बल्लेबाज या गेंदबाज हैं लेकिन ऑलराउंडर के तौर पर तब मुंबई इंडियंस ने हार्दिक पंड्या पर कीरॉन पोलार्ड को तरजीह दी थी. वो भी तब जबकि 2022 से पहले मुंबई इंडियंस ने जो पांच खिताब जीते थे, उसमें से चार बार हार्दिक पंड्या उनकी टीम का हिस्सा रहे थे.हार्दिक पंड्या ने तो मुंबई के साथ ही अपना आईपीएल करियर शुरू किया था. इसी फ्रेंचाइजी के लिए 2015 में वो 10 लाख में अनकैप्ड प्लेयर के तौर पर आए थे. लेकिन जब फिटनेस लड़खड़ाई और गेंदबाजी में तकलीफ आई तो मुंबई इंडियंस ने उनका दामन छोड़ दिया था. हार्दिक पंड्या को लालची बताने वाले लोग तब कहां थे? उस वक्त मुंबई इंडियंस के मालिकों ने अपना फायदा देखा था.

मुंबई इंडियंस के लिए हार्दिक पंड्या का प्रदर्शन

मुंबई इंडियंस के लिए 2015 से लेकर 2021 के बीच हार्दिक पंड्या ने करीब डेढ़ हजार रन बनाए थे. 2015-2016 में वो टीम से अंदर बाहर होते रहे. लेकिन 2017 से लेकर 2021 के बीच उन्होंने सीजन में लगभग हर मैच खेला. इस दौरान उन्होंने 2017 में 250 रन, 2018 में 260 रन, 2019 में 402 रन, 2020 में 281 रन, 2021 में 127 रन बनाए थे. अब आइए गेंदबाजी पर. मुंबई इंडियंस के लिए खेलते हुए उन्होंने 42 विकेट लिए हैं. इसका लेखा-जोखा भी जान लीजिए. 2017 में उन्होंने 6 विकेट लिया था. 2018 में उन्होंने 18 विकेट लिए थे. 2019 में उनके खाते में 14 विकेट थे. 2020 में उन्होंने 14 मैच खेले थे और 2021 में 12, लेकिन इन दोनों सीजन में उन्होंने गेंदबाजी नहीं की. बात यहीं बात फंसती है. इसी के बाद उन्हें रिलीज करने का फैसला किया गया.

ऐसा भी कहा जाता है कि तब हार्दिक पंड्या ने ये शर्त रखी थी कि उन्हें टॉप पर रिटेन किया जाए, जिसमें ज्यादा पैसे मिलते हैं. रिटेन किए गए चार खिलाड़ियों में पहले खिलाड़ी को 16 करोड़, दूसरे को 12 करोड़, तीसरे को 8 करोड़ और चौथे को 6 करोड़ दिए जाने का नियम है. इसे सच मान भी लिया जाए तो इसमें भी कौन सी गलती है. बतौर ‘प्रोफेशनल’ खिलाड़ी ये उनका हक था. उस वक्त मुंबई इंडियंस को हार्दिक पंड्या की ‘वर्थ’ इतनी नहीं लगी होगी.

कोई तोहफा नहीं हार्दिक ने खुद को साबित किया

मुंबई इंडियंस से रिलीज किए जाने के बाद हार्दिक पंड्या 2022 में गुजरात टाइटंस के कप्तान बनाए गए. उन्होंने नई टीम बनाई. 2022 में उन्होंने वापस गेंदबाजी करना भी शुरू किया. इस सीजन में 487 रन बनाने के साथ साथ उन्होंने 8 विकेट भी लिया. उनकी टीम पहले ही सीजन में चैंपियन बन गई. दूसरे सीजन यानी 2023 में भी उनकी टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया. इस बार भी हार्दिक पंड्या ने 346 रन बनाए और 3 विकेट लिए. ये प्रदर्शन तो गुजरात टाइटंस के लिए था. लेकिन ऐसा नहीं है कि इससे पहले मुंबई इंडियंस को उन्होंने मैच नहीं जिताए थे.

2015 में उन्होंने चेन्नई के खिलाफ मैच में 8 गेंद पर 21 रन बनाए थे. इसके बाद 2019 में चेन्नई के खिलाफ ही उन्होंने एक मैच में 8 गेंद पर 25 रन बनाने के बाद धोनी, जडेजा और दीपक चाहर को आउट करके जीत दिलाई थी. 2019 में कोलकाता के खिलाफ उन्होंने 34 गेंद पर 91 रन की पारी खेली थी. इस पारी को अब तक आईपीएल की उनकी सबसे बेहतरीन पारी माना जाता है. 2020 में प्लेऑफ मैच में उन्होंने दिल्ली के खिलाफ 14 गेंद पर 37 रन की नॉट आउट पारी खेली थी.

इससे पहले उन्होंने अपने डेब्यू सीजन में भी कोलकाता के खिलाफ एक मैच में 31 गेंद पर 61 रन की पारी खेली थी. ये आंकड़े हमने इसीलिए साझा किए जिससे ये बात समझ समझ आ जाए कि हार्दिक पंड्या को अब तक जो कुछ मिला है वो उन्हें किसी भी फ्रेंचाइजी ने तोहफे के तौर पर नहीं दिया है बल्कि वो उसे ‘डीसर्व’ करते हैं.

कैसे तेजी से बदला आईपीएल का समीकरण

चलिए अब आईपीएल के पहले सीजन में चलते हैं. आईपीएल की शुरूआत में कहा गया था ये टूर्नामेंट घरेलू खिलाड़ियों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों में उनके राज्यों के लिए ‘कनेक्ट’ पैदा करने जैसा होगा. ये आईपीएल के तमाम मकसदों में शामिल था. तभी सहवाग दिल्ली के थे और युवराज पंजाब के. लेकिन धीरे-धीरे ये सारी बातें पीछे छूटती चली गईं. सहवाग भी एक वक्त पर पंजाब के लिए खेल आए. एक समय पर आईपीएल की हर फ्रेंचाइजी पर 30 से ज्यादा खिलाड़ी हुआ करते थे. अब ऐसा नहीं है. टीम मालिक कई बार खिलाड़ियों को इसलिए भी टीम में ले लिया करते थे कि वो किसी दूसरी टीम से ना खेल पाएं. पूरी की पूरी टीम एक साथ ‘ट्रैवल’ किया करती थी. देर रात तक पार्टियां चला करती थीं. फिर वो समय आया जब टीम मालिकों ने जबरदस्त कटौती शुरू की. टीम में खिलाड़ियों की तादाद कम हुई. खिलाड़ियों के कम होने से ट्रैवल और होटल जैसे खर्च कम हुए. कुल मिलाकर खर्च कम करने का मकसद दिखने लगा. आईपीएल में भी ‘कॉस्ट-कटिंग’ होने लगी.

इन सारे फैसलों में खिलाड़ियों का कोई रोल नहीं था बल्कि सब कुछ मालिकों ने तय किया था. यानी हार्दिक पंड्या आज ‘ट्रोल’ करने की बजाए ये समझना चाहिए कि आज मुंबई को उनमें एक अच्छा ऑलराउंडर और भविष्य का कप्तान दिखता है इसलिए उन्होंने अपनी तिजोरी खोली है ये कोई तोहफा नहीं है.

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