ज्ञानवापी: सर्वे रिपोर्ट तैयार, फिर भी ASI क्यों मांग रहा तारीख पर तारीख?

वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्ववेश की अदालत ने सील वजूखाने को छोड़कर ज्ञानवापी परिसर के सर्वे का आदेश 21 जुलाई को दिया था. 24 जुलाई से एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग) ने सर्वे शुरू किया तो अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे के आदेश पर रोक लगाई और मसाजिद कमेटी को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने का आदेश दिया. हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और चार अगस्त को जिला जज के आदेश को सही ठहराया. चार अगस्त से एएसआई ने सर्वे शुरू किया, जो अक्टूबर के अंत तक चला.

दो नवंबर को एएसआई ने जिला जज की अदालत को बताया कि सर्वे पूरा हो गया, लेकिन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है. जिला जज की अदालत ने 15 दिन का समय दिया और 18 नवंबर को रिपोर्ट सबमिट करने को कहा. अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने एएसआई के रिपोर्ट सबमिट करने की समय सीमा बढ़ाने वाली प्रार्थना पत्र का विरोध किया. 18 नवंबर को एक बार फिर जिला जज की अदालत में एएसआई ने रिपोर्ट सबमिट करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा. अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने फिर विरोध किया.

अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने किया विरोध

जिला जज की अदालत ने एएसआई को 10 दिन का समय और दिया. 28 नवंबर को तीसरी बार एएसआई ने रिपोर्ट सबमिट करने के लिए तीन हफ्ते का समय और मांगा. इस बार भी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने कहा कि एएसआई तारीख पर तारीख मांग कर मामले को लंबा खींचना चाहती है. हम इसका विरोध करते हैं. शोक दिवस के कारण जिला जज की अदालत ने एएसआई के तीन हफ्ते का समय मांगने वाली प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के लिए 29 नवंबर की तारीख दी.

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बता दें कि सील वजूखाने के सर्वे को लेकर वकील विष्णु जैन की याचिका पर एक दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है. ये तीसरी बार है, जब एएसआई ने रिपोर्ट सबमिट करने के लिए समय सीमा बढ़ाने के लिए जिला जज की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया है और तीनों ही बार समय सीमा बढ़ाने के लिए प्रार्थना पत्र में जो आधार दिया है, वो इस प्रकार है.

  • सर्वे की डिटेल स्टडी के लिए और वक्त चाहिए.
  • हैदराबाद लैब से जीपीआर रिपोर्ट आने का इंतजार है.
  • सर्वे से जुड़े कई तकनीकी मामलों पर एक्सपर्ट्स की राय मांगी गई है.
  • मामला बेहद संवेदनशील होने के कारण वो रिपोर्ट सबमिट करने से पहले अपनी तरफ से कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं.

(इनपुट- अमित कुमार सिंह)

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