
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने हलाल सर्टिफिकेट वाले प्रोडक्ट पर बैन लगा दिया है. इस मामले में राजधानी लखनऊ में एक एफआईआर दर्ज हुई. FIR में कहा गया कि कुछ कंपनियां एक खास समुदाय में अपने प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए हलाल सर्टिफिकेट का इस्तेमाल कर रही हैं. इससे लोगों की जनभावनाएं आहत हो रही हैं. FIR में जिन कंपनियों के नाम शामिल हैं, उनमें चेन्नई की हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, जमीयत उलेमा महाराष्ट्र मुंबई, हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया मुंबई, जमीयत उलेमा हिंद हलाल ट्रस्ट दिल्ली समेत और कुछ अज्ञात कंपनियां भी शामिल हैं.
ऐसे में सवाल उठता है कि मांस से लेकर पानी की बोतल तक की बिक्री के लिए देश की कौन-कौन एजेंसियों से सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है और ये एजेंसियां किस तरह के प्रोडक्ट पर अपनी मुहर लगाने की अनुमति देती हैं.
सबसे पहले बात मांस के हलाल सर्टिफिकेशन की
आमतौर बाजार में दो तरह का मांस होता है. हलाल और झटका. जब किसी जानवर को मारने से पहले दुआ पढ़ी जाती है. पहले गर्दन और फिर सांस लेने वाली नली को काटा जाता है तो उससे मिलने वाले मांस को हलाल मांस यानी हलाल मीट कहते हैं. वहीं, जब जानवर को एक झटके में मार दिया जाता है तो उस मांस को झटका मीट कहते हैं.
मीट हलाल है या झटका, इसे सर्टिफाई करने का काम आधिकारिक सरकारी एजेंसी नहीं करतीं. या यूं कहें कि अब तक इसके लिए कोई सरकारी एजेंसी बनाई ही नहीं गई. इसलिए देश की कुछ प्राइवेट एजेंसी अपने मीट प्रोडक्ट पर लेबल लगाकर दावा करती हैं कि वो हलाल है.
देश में हलाल सर्टिफिकेशन की शुरुआत 1974 में हुई थी. बाद में इसे साल 1993 तक बढ़ाया गया. लेकिन सवाल है कि जब सरकार ने मान्यता नहीं दी तो फिर प्राइवेट कंपनियां ऐसा कैसे कर रही हैं.
दरअसल, देश में कई ऐसी प्राइवेट कंपनियां हैं जिन्होंने इस्मालिक देशों से इसकी मान्यता हासिल की और उन्हें भारत में मुस्लिम उपभोक्ताओं का समर्थन भी मिला. हाल में उत्तर प्रदेश का मामला उठने पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, फूड प्रोडक्ट के सर्टिफिकेशन का काम सरकारी एजेंसियों को ही करना चाहिए. गैर-सरकारी एजेंसी की ओर से इसे सर्टिफिकेट देना ठीक नहीं है.
फूड प्रोडक्ट के लिए इन एजेंसियों का सर्टिफेट लेना अनिवार्य
देश में तीन प्रमुख सरकारी एजेंसियां हैं जो फूड प्रोडक्ट्स के सर्टिफिकेशन का काम करती हैं.
- FSSAI: फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया केंद्र सरकार की एजेंसी है. यह केंद्र और राज्य सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों से जुड़े फूड प्रोडक्ट के मामलों को देखती है. देश की किसी भी कंपनी को नए प्रोडक्ट की बिक्री से पहले FSSAI से रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है. आम लोगों को इसके कई फायदे भी मिलते हैं. इस एजेंसी के सर्टिफिकेशन के कारण शुद्ध खानपान वाली चीजें ही मिलती हैं. हानिकारक और जहरीले पदार्थ वाले फूड प्रोडक्ट बाजार में नहीं पहुंच पाते. डेयरी प्रोडक्ट से लेकर पानी की बोतल और पैकेज्ड मशरूम तक में FSSAI की मुहर होती है. यही इसकी शुद्धता का मानक होता है. ऐसा न होने पर इसे मानकों के अनुरूप नहीं माना जाता.
- ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स: इसे भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) कहते हैं. यह एजेंसी उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत काम करती है. यह कई तरह के प्रोडक्ट को सर्टिफाय करने का काम करती हैं. इसमें गोल्ड से लेकर फूड प्रोडक्ट तक शामिल हैं. भारतीय मानक ब्यूरो तय करता है कि किसी प्रोडक्ट को मानकों के अनुरूप बनाया गया है या नहीं. उसकी क्वालिटी मानकों के अनुरूप है या नहीं और कहीं उसे गैर-कानूनी तरीके से तो नहीं बनाया गया.
- एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी: देश में जितने भी एग्रीकल्चरल और प्रोसेस्ड फूड तैयार होते हैं, उसे भारत सरकार की इस एजेंसी का सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होता है. इसमें भारत से लेकर विदेशों तक भेजे जाने वाले सब्जियां, अनाज, फल और मीट प्रोडक्ट तक शामिल हैं.
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